मुर्दे बेशक खामोश होते है मगर ये ख़ामोशी भी बहुत कुछ बयान करती है।
अस्तीपुर को हिला देने वाली प्रीतम डबराल की निर्मम हत्या को एक साल बीत चूका है। युगांत कपूर उर्फ़ युग उसे मिली हुई नयी ज़िम्मेदारी को आत्मसात कर चुका है। जिम्मेदारी जो उसे लायी है नरक की आत्माओं और बुरी शक्तियों से जुडी हुई एक काली अँधेरी दुनिया में, जहाँ उसका एक मात्र साथी है, सत्या।
इस दुनिया के बारे में जान ने के दौरान , उसे सुनाई देती है एक लड़की की बेबस पुकार और दिखाई देते है उसके साथ हुए कुकृत्य के हिरदयविरादक दृश्य।
एक नए केस रुट ६६ ने अस्तीपुर को झकझोर के रख दिया है। क्या नए अस पी राजिव सिंह सुलझा पाएंगे इस केस की गुथी को या डूब जाएंगे अस्तीपुर नामक इस स्याह के दलदल में ? क्या इस केस को सुलझाने के बाद थमेगा अस्तीपुर में अराजकता का माहौल या फिर जल जाएगा अस्तीपुर इस मामले की आग में।
केवल समय ही बताएगा।
टीम स्वयंभू पेश करते है – सतयुग अंक 2
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